राजसमंद की ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण को लेकर महिमा कुमारी मेवाड़ ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री से की मुलाकात

Admin 17 August 2026, 12:09 3 बार पढ़ा राजसमंद
नई दिल्ली। राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर राजसमंद की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का मुद्दा उठाया। बैठक में राजसमंद झील की जर्जर पाल, नौ चौकी पाल की सुरक्षा, राज प्रशस्ति शिलालेख के संरक्षण और गोमती नदी के प्राकृतिक प्रवाह मार्ग से अतिक्रमण हटाने की मांग रखी गई। सांसद ने पाल के तकनीकी सर्वेक्षण व संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट, नौ चौकी पाल में CCTV एवं सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा ऐतिहासिक धरोहरों के वैज्ञानिक संरक्षण के लिए केंद्रीय स्तर पर आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।
राजसमंद की ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण को लेकर महिमा कुमारी मेवाड़ ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री से की मुलाकात

नई दिल्ली। राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर राजसमंद की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।

मुलाकात के दौरान सांसद ने विशेष रूप से ऐतिहासिक राजसमंद झील की जर्जर होती पाल, नौ चौकी पाल की सुरक्षा एवं संरक्षण, राज प्रशस्ति शिलालेख की स्थिति तथा गोमती नदी के प्राकृतिक प्रवाह मार्ग में अतिक्रमण जैसे विषयों को केंद्रीय मंत्री के समक्ष प्रमुखता से रखा।

सांसद ने बताया कि राजसमंद झील की नौ चौकी पाल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है। यह स्थल मेवाड़ के इतिहास, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यहां 24 विशाल शिलाओं पर अंकित ‘राज प्रशस्ति’ शिलालेख ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जर्जर पाल के संरक्षण के लिए तकनीकी सर्वेक्षण की मांग

महिमा कुमारी मेवाड़ ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि राजसमंद झील की पाल कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त एवं कमजोर स्थिति में है। लंबे समय से नियमित रखरखाव के अभाव, पेड़-पौधों की जड़ों तथा कटाव-क्षरण के कारण पाल की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हो रही है।

उन्होंने पाल का उच्च स्तरीय तकनीकी सर्वेक्षण एवं संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट तत्काल कराने तथा मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और दीर्घकालीन संरक्षण के लिए विशेष केंद्रीय परियोजना के माध्यम से आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने की मांग रखी।

नौ चौकी पाल की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर

सांसद ने नौ चौकी पाल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि स्मारक परिसर में पर्याप्त सुरक्षा एवं आधुनिक निगरानी व्यवस्था का अभाव है। ऐतिहासिक संरचनाओं को नुकसान से बचाने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन, सीसीटीवी एवं आधुनिक निगरानी प्रणाली की आवश्यकता है।

महिमा कुमारी मेवाड़ ने इससे पहले भी नौ चौकी पाल के लिए जिला प्रशासन राजसमंद के अंतर्गत निगरानी समिति गठित करने का आग्रह किया था।

राज प्रशस्ति और ऐतिहासिक स्थापत्य के संरक्षण पर विशेष चिंता

सांसद ने ‘राज प्रशस्ति’ सहित ऐतिहासिक शिलालेखों, पत्थरों की नक्काशी और नौ चौकी पाल की स्थापत्य विरासत के वैज्ञानिक संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी धरोहरों के संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही आने वाली पीढ़ियों के लिए अपूरणीय क्षति बन सकती है।

गोमती नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने की मांग

राजसमंद झील के प्रमुख जलस्रोत गोमती नदी के प्राकृतिक प्रवाह मार्ग में अतिक्रमण का विषय भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा गया। सांसद ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करने वाले अतिक्रमणों को हटाने तथा इसके मूल स्वरूप को बहाल करने के लिए विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता बताई।

लगातार जारी है सांसद की पहल

राजसमंद की ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण को लेकर महिमा कुमारी मेवाड़ लगातार केंद्र सरकार के स्तर पर विषय उठा रही हैं। इससे पूर्व 2 जून, 31 जुलाई और 5 अगस्त 2026 को भी उन्होंने केंद्रीय संस्कृति मंत्री को पत्र भेजकर राजसमंद झील एवं नौ चौकी पाल के संरक्षण से जुड़े विषयों पर कार्रवाई का आग्रह किया था।

5 अगस्त को उन्होंने विशेष रूप से नौ चौकी पाल के संरक्षण एवं निगरानी के लिए जिला प्रशासन के अंतर्गत निगरानी समिति गठित करने का आग्रह किया था।

सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने कहा कि राजसमंद झील और उससे जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरें केवल राजसमंद या मेवाड़ की पहचान नहीं, बल्कि देश की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत हैं। इनका संरक्षण हमारी वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस गौरवशाली इतिहास को उसी गरिमा के साथ देख और समझ सकें।

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