राजसमंद में 45 में से 19 वार्ड सामान्य अनारक्षित, 9 महिलाओं के लिए आरक्षित
वन स्टेट-वन इलेक्शन के तहत राजसमंद जिले में नगर निकाय चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में वार्ड आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। इस दौरान नगर परिषद राजसमंद सहित नाथद्वारा, आमेट, देवगढ़ और भीम नगर पालिकाओं के कुल 155 वार्डों का आरक्षण तय किया गया।
लॉटरी प्रक्रिया दोपहर 3 बजे शुरू हुई और शाम करीब 5:30 बजे तक सभी वार्डों का आरक्षण तय कर दिया गया। आरक्षण की स्थिति सामने आते ही निकाय क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। खास तौर पर नगर परिषद राजसमंद में सभापति पद सामान्य होने से सभापति पद के दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है।
नगर परिषद राजसमंद के कुल 45 वार्डों में 19 सामान्य अनारक्षित, 9 सामान्य महिला, 6 ओबीसी, 3 ओबीसी महिला, 3 एससी, 3 एससी महिला, 1 एसटी और 1 एसटी महिला के लिए आरक्षित किए गए हैं।
वहीं जिले की पांचों निकायों के कुल 155 वार्डों में 66 सामान्य, 31 सामान्य महिला, 20 ओबीसी, 11 ओबीसी महिला, 13 एससी, 8 एससी महिला, 4 एसटी और 2 एसटी महिला श्रेणी में रखे गए हैं।
सभापति पद के दावेदारों की बढ़ी सक्रियता
इस बार सभापति और पालिकाध्यक्ष का चुनाव पार्षदों में से ही होगा। दोनों पदों की सीट पहले ही सामान्य घोषित हो चुकी है। ऐसे में सामान्य अनारक्षित और सामान्य महिला वार्डों पर राजनीतिक दलों की विशेष नजर रहेगी।
राजसमंद नगर परिषद के सामान्य अनारक्षित वार्डों में 5, 12, 16, 20, 22, 24, 28, 29, 30, 32, 35 और 36 सहित कुल 19 वार्ड शामिल हैं। इन वार्डों में सामान्य वर्ग के मतदाताओं का प्रभाव माना जा रहा है।
खास बात यह रही कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में सभापति पद के संभावित दावेदारों के गृह क्षेत्र वाले कुछ वार्ड भी अनारक्षित श्रेणी में आ गए हैं। ऐसे में दावेदारों को दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
राजसमंद नगर परिषद का राजनीतिक इतिहास
राजसमंद नगर पालिका का गठन वर्ष 1952 में हुआ था और वर्ष 2012 में इसे नगर परिषद के रूप में क्रमोन्नत किया गया। अब तक अधिकांश समय सभापति पद सामान्य वर्ग के पास रहा है।
वर्ष 2011 से 2016 तक कांग्रेस की आशा पालीवाल सामान्य महिला सभापति रहीं। इसके बाद 2016 से 2021 तक भाजपा के सुरेश पालीवाल सभापति रहे। वर्ष 2021 से वर्तमान में कांग्रेस के अशोक टांक सभापति हैं, जो ओबीसी वर्ग से हैं।
आरक्षण की लॉटरी के बाद अब सभी की नजरें राजनीतिक दलों के टिकट वितरण पर टिक गई हैं। खासकर सामान्य अनारक्षित 19 वार्ड सभापति पद के संभावित दावेदारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।