बच्चों की निजता से समझौता नहीं स्कूलों में फोटो-वीडियो पर पाबंदी को लेकर शिक्षा मंत्री दिलावर ने दी सफाई
जयपुर, 17 अगस्त 2026। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति फोटो और वीडियो बनाने पर जारी आदेश को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इसी बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मामले पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि बच्चों की निजता और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने स्कूलों में फोटो या वीडियो बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है। हालांकि, किसी व्यक्ति द्वारा बिना उचित कारण बच्चों का इंटरव्यू लेने, उनसे अनावश्यक सवाल करने या उनकी तस्वीरें और वीडियो बनाने से उनकी निजता प्रभावित हो सकती है।
अभिभावकों की अनुमति जरूरी
दिलावर ने कहा कि नाबालिग बच्चों की फोटो लेने या उनका बयान रिकॉर्ड करने से पहले अभिभावकों की अनुमति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन की होती है, जबकि घर पर यह जिम्मेदारी माता-पिता की होती है।
बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश पर भी जताई आपत्ति
शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्कूलों में शिक्षक, स्कूल प्रबंधन समिति और अभिभावक नियमित रूप से बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर नजर रखते हैं। हर महीने अभिभावक-शिक्षक बैठक भी आयोजित होती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का बिना अनुमति स्कूल परिसर में प्रवेश करना और वहां जाकर कुछ भी रिकॉर्ड करना उचित नहीं है। स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी है कि बच्चों के अधिकारों और निजता की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
कांग्रेस ने सरकार के आदेश पर उठाए सवाल
इस मामले में कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने सरकार के आदेश पर सवाल उठाए थे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से 16 अगस्त को जारी पत्र में बिना अनुमति स्कूल परिसर में फोटो खींचने और वीडियो बनाने पर रोक की बात कही गई थी।
जूली ने आरोप लगाया कि स्कूलों की समस्याओं को लेकर बच्चे अपनी आवाज उठा रहे हैं और उनके वीडियो सोशल मीडिया व मीडिया में सामने आ रहे हैं, जिससे सरकार असहज हो रही है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की मुखरता से सरकार को घबराने के बजाय स्कूलों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।